“जिन्दगी  को करीब से देखा है…..”

आज फिर एक बार जिन्दगी को,  बहुत करीब से देखा है ।        कितनी मासूम है, कितनी  अनजान है,              जैसे बेजुबान है। आज फिर एक बार जिन्दगी को, करीब से देखा है ।।         ये तो जानती  भी नही, कि अब कितना   जिऊगी,  …

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कैसे कह  लूं

एक ख्याल सा तू,  या हसीन ख्वाब ,कैसे कह लूँ मेरे साथ सा तू , या बस एहसास ,कैसे कह लूँ एक मंजिल सा तू, या बस तलाश, कैसे कह लूँ मैं मुसाफिर जहाँ, वहाँ एक राह सा तू या बस इत्तेफ़ाक़ ,कैसे कह लूँ मेरी ज़िन्दगी की, हर साँस में तू मैं भी तेरी …

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