एक सर्द रात, और चाँद !

​आज चाँद का इस सर्द रात में,

                यूं पूरा निकलना-

इसकी चाँदनी का,

                यूं दिल म चुभना,-

किसी सजा से कम नहीं।


                 कितनी बेचैनी बढ़ रही है,

                तेरी चाँदनी की चुभन से।

आज एक दर्द सा है,

जो असहनीय है।

                   आज तुझे देखने का, 

                   जो बेचैनी भरा सुकून है।

ये बहुत ही जुदा है।


न कुछ कह सकते है,

न तेरी चाँदनी अब सह सकते है।

                     एक अजीब सा नशा है, इस रात में,


                     जो खुले आसमाँ के नीचे ,

                     तेरा दीदार किये जा रही हूँ।

क्यों, 

         तुझे महसूस किये जा रही हूँ।

         इस खुबसूरत रात की तनहाई में

मैं खुद को भूलकर तुझमें,

तुझसे बिन कहे बात किये जा रही हूँ,

बस तुझे देखे जा रही हूँ।

                           By- Ritu Tomar

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69 thoughts on “एक सर्द रात, और चाँद !

  1. हुसन वालों की भी क्या-क्या हसीन आदतें होती.!
    नींद में सोते-सोते लाइक टिक कर चैन से सोती.!!

    इश्क तड़पता तड़पे रात-रात भर उनकी बलासे.!
    सुबह उठ हाल पूछ फिर मुंह चुरा धीरे से हंसती.!!

    हर बुत को खुदा ने एक-से-एक बढ़ कर बनाया.!
    नखरा एक-सा बेशक तस्वीर सबकी अलग होती.!!

    माना कोई रुका नहीं हरदम किसी खातिर यहां.!
    जाते-जाते कम-से-कम गुड नाईट तो कहे होती.!!

    ‘सागर’ पछतायेगा ना मुहब्बत कर हुस्न वालों से.!
    इतराना दिल चुराना इनकी तबियत ऐसी ही होती.!!

    Ritu Ma’am G .iIf you mind it & don’t like please Delete it.

    Liked by 1 person

      1. Agree…
        आज वक़्त का तकाज़ा है,
        हुस्न की हर बात को मानना होगा.!
        हुस्न करे जो भी सब माफ़,
        इश्क को मगरूरत हटाना होगा.!!

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      2. What Happened Ritu Ma’am…
        रात रात भर जाग गर सितारों से मुकाबला करोगे,
        तय है अपने जिस्म को बीमार ही करोगे.!
        अमां यारा कभी कोई क़ायनात से भी लड़ सका है,
        जो चाँद-तारों से अपनी बराबरी करोगे.!!

        जवान हो कमसिन हो और गोरी-चिट्टी माना सब,
        क्या अपनी जवानी यूँ ही ख़राब करोगे.!
        उम्र पढ़ने-लिखने ज़िन्दगी की इबारतें लिखने की,
        क्या माँ-बाप की ख्वाहिश तबाह करोगे.!!

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    1. It’s your greatness Ritu-G.
      वो ज़िन्दगी किस नाम की जहाँ खुद को ही बुलंद समझा.!
      ऊँचे-ऊँचे दरख़्त छांव देते कभी खुद पर गुमां ना करते.!!

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      1. और जिससे हर मौसम की शान उसे ऋतू(जी)कहते हैं…
        ऋतू ज़िन्दगी जीने का एहसास कराती’सागर’का काम है बहना वीरान राहों की और…..

        ज़िन्दगी खुद में ही शायरी है,
        मुहब्बत-नफरत-ज़ज़्बातों-रिश्तों-भाईचारे से लबरेज़.!
        ‘सागर’तो बस नाम का ही है,
        शहर से निकल गुज़रे बिया-बाण ना करे कोई गुरेज़.!!

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      2. This I don’t like Ritu-G……Be Brave…Khud par yaqeen rakhein ek din jeet aapki hi hogi…

        नामुम्किन शब्द कमजोरी दिखाता है,
        लड़कियां अब इससे बहुत आगे निकल चुकी हैं.!
        कई ऐसे काम हुवे कोई ना कर पाया,
        ‘सागर’माँ-बहन-बेटी दुनियां कदमों ला चुकी है.!!

        Liked by 1 person

  2. Very nice Ritu-G.
    एक सर्द रात वो और चाँद,
    इक फलक दूजा ज़मीं पर.!
    नज़र चुराऊँ बता कहाँ से,
    हुस्न का मिलन है जहाँ पर.!!

    तुझे देखूं या उसे कश्मकश,
    पैर नहीं आजकल ज़मीं पर.!
    खुद से हैरान हूँ मुक़द्दर से,
    यक़ीं नहीं”सागर”नसीब पर.!!

    Liked by 2 people

      1. My pleasure Ritu Tomar-G
        ” ए चाँद कभी खुल कर बादलों से बाहर तो आ.!
        पलकें बिछाये “सागर” खुद में समेटना चाहता.!! “

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